
रिपोर्ट: जवाहर राजपूत
सिधौली/सीतापुर।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामप्रकाश सिंह एडवोकेट ने मंगलवार को उपजिलाधिकारी सिधौली को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिधौली की अव्यवस्थाओं और पशुओं में फैल रही संक्रामक बीमारियों को लेकर टीकाकरण में लापरवाही का मुद्दा उठाया। संगठन ने दोनों मामलों की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सीएचसी में अवैध वसूली और स्टाफ की कमी के आरोप
पहले ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सीएचसी सिधौली के अंतर्गत कई गांवों में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए छिड़काव नहीं कराया गया है। कई ग्राम पंचायतों में आशा और ग्राम प्रधानों के खाते तक नहीं खोले गए हैं, जिससे स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन में बाधा आ रही है।
संगठन ने कहा कि सीएचसी में प्रसव कराने आने वाले मरीजों के परिजनों से प्रति डिलीवरी 500 से 700 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 100 से 200 रुपये वसूले जा रहे हैं।
आरोप यह भी लगा कि रात्रि के समय अस्पताल में चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहते। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रात्रि निवास न कर निजी अस्पताल संचालित करते हैं, जिससे आपातकालीन मरीजों को दिक्कत होती है। मेडिकल परीक्षण के लिए पुलिस द्वारा लाए गए पीड़ितों से भी कर्मचारियों द्वारा परिजनों से मनमाने तरीके से धन वसूलने और आशा बहुओं से वाउचर जमा करने पर प्रति वाउचर 200 रुपये लिए जाने की शिकायत की गई।
ज्ञापन में जीवनरक्षक दवाओं के अभाव और सिंहपुर गांव स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र के नियमित न खुलने का भी जिक्र किया गया।
पशु टीकाकरण में कागजी खानापूर्ति का आरोप
दूसरे ज्ञापन में संगठन ने क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारियों को लेकर चिंता जताई। कहा गया कि सरकार द्वारा हर साल चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान में कई गांवों में अभी तक टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है। केवल कागजों पर टीकाकरण दिखाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
संगठन ने बताया कि पिछले वर्ष टीकाकरण न होने से कई गांवों में खुरपका – मुंहपका फैलने से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी। यदि समय रहते व्यापक टीकाकरण नहीं हुआ तो इस वर्ष भी पशुपालकों को भारी नुकसान हो सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) लोकतांत्रिक ने उपजिलाधिकारी से दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और पशु टीकाकरण व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है।









