
रिपोर्ट अमृतपुर तहसील संवाददाता कुलदीप
फर्रुखाबाद जनपद फर्रुखाबाद की तहसील अमृतपुर क्षेत्र में विकास के दावों के बीच एक सरकारी नाले पर बनी पुलिया वर्षों से बदहाली का दंश झेल रही है। अमृतपुर-राजेपुर-अमृतपुर मार्ग से मोहद्दीपुर होते हुए बमियारी गांव तक जाने वाली सड़क पर बनी यह पुलिया न केवल क्षतिग्रस्त है, बल्कि ग्रामीणों के लिए एक बड़ा खतरा भी बन गई है।
मोहद्दीपुर से बमियारी के बीच पड़ने वाली यह पुलिया काफी समय से टूटी हुई है और इसकी स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। यह पुलिया एक गहरे सरकारी नाले पर बनी है, जहां नीचे लगभग 20 फुट तक पानी भरा रहता है। पुलिया की खराब हालत के कारण राहगीरों और वाहन चालकों के लिए हर पल खतरा बना रहता है। इस मार्ग का उपयोग भुड़िया, इमादपुर, बमियारी सहित कई गांवों के ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों के लिए करते हैं।

गहरे नाले ने बढ़ाई चिंता
पुलिया के नीचे 20 फुट गहरे पानी भरे नाले ने ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया है। विशेष रूप से रात के समय जब दृश्यता कम होती है, इस पुलिया से गुजरना अत्यंत जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे हर समय इस डर में रहते हैं कि कब पुलिया का कोई हिस्सा ढह जाए या कोई वाहन अनियंत्रित होकर नाले में गिर जाए।
स्कूली बच्चों और मरीजों को भी परेशानी
पुलिया की जर्जर हालत का असर स्कूली बच्चों और मरीजों पर भी पड़ रहा है। प्रतिदिन इसी मार्ग से होकर स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को जान हथेली पर रखकर पुलिया पार करनी पड़ती है। वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने के लिए भी मरीजों को इसी खतरनाक रास्ते का सहारा लेना पड़ता है।
वर्षों से निर्माण का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और वे कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पुलिया के निर्माण की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद, अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। सरकारी नाले पर बनी इस महत्वपूर्ण पुलिया की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने फिर से संबंधित विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मोहद्दीपुर से बमियारी मार्ग पर स्थित इस जर्जर पुलिया का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि भुड़िया, इमादपुर, बमियारी सहित आसपास के गांवों के लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने आगाह किया है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।









