
उज्जैन महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी के तहत शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। लेकिन इसी मार्ग पर स्थित सैकड़ों साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें पिछले 6 दिनों से इस मंदिर की विशाल प्रतिमा को सुरक्षित रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित करने में जुटी हैं। भारी-भरकम क्रेन, जेसीबी और अन्य साधनों का इस्तेमाल किया जा चुका है, लेकिन बेसाल्ट पत्थर से बनी यह प्राचीन मूर्ति अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली है। इस घटना के बाद क्षेत्र में आस्था और कौतूहल दोनों का माहौल है।
इतिहासकारों के मुताबिक यह मूर्ति परमार वंश के समय की है। मालवा क्षेत्र में मिलने वाले बेहद कठोर बेसाल्ट पत्थर को तराश कर इसे बनाया गया है। परमार काल में बड़ी मूर्तियों को स्थापित करने के लिए विशेष इंटरलॉकिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता था, जिसमें मूर्ति को जमीन में कई फीट गहराई तक मजबूती से स्थापित किया जाता था। यही कारण है कि आधुनिक मशीनें भी इसे निकालने में नाकाम हो रही हैं।
जब पारंपरिक तरीकों से बात नहीं बनी तो नगर निगम ने वैज्ञानिक तरीका अपनाया। मंदिर के पुजारी महेश बैरागी और स्थानीय रहवासियों ने नगर निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर मांग की थी कि मूर्ति को हटाने से पहले वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
इसी अनुरोध पर नगर निगम ने IIT इंदौर के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया। मंगलवार को IIT की एक टीम ने मंदिर का प्रारंभिक जायजा लिया था। इसके बाद बुधवार को विशेषज्ञों की टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ उज्जैन पहुंची और मूर्ति की गहराई, वजन, नींव और आसपास की मिट्टी की बनावट की जांच शुरू कर दी है।
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि IIT की टीम को पुजारी जी की इच्छा पर ही बुलाया गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए कैसे और कब स्थानांतरित किया जा सकता है।
वहीं मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा, हमें प्रशासन की कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है। हमारी बस यही मांग है कि आधुनिक तकनीक से पूरी जांच हो जाए और सही रिपोर्ट आने के बाद ही मूर्ति को किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए।
एसडीएम एल एन गर्ग ने कहा, प्रशासन श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की भावनाओं का पूरा सम्मान करता है। सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लिए बिना कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। सिंहस्थ के लिए विकास जरूरी है, लेकिन उज्जैन की धार्मिक आस्था और प्राचीन विरासत को बचाना भी उतना ही जरूरी है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर साफ किया है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से किसी भी सूरत में खिलवाड़ नहीं होगा और मंदिर को लेकर कोई भी निर्णय सर्वसम्मति से ही लिया जाएगा।
उधर मूर्ति के न हिलने की खबर फैलते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। बुधवार को सुबह से लेकर देर शाम तक खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। लोग इसे हनुमान जी की लीला और चमत्कार मान रहे हैं।








