तहसील संवाददाता अमृतपुर कुलदीप की रिपोर्ट –
फर्रुखाबाद के राजेपुर थाना अंतर्गत दौलतपुर गांव में दिनाँक 12 मई 2026 को व्यवस्था की एक ‘कातिल’ चूक ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। विद्युत सुधार कार्य के लिए विधिवत ‘शटडाउन’ लेने के बावजूद अचानक विद्युत प्रवाह शुरू हो जाने से एक युवक काल के गाल में समा गया। विभाग की इस घोर प्रमादपूर्ण कार्यशैली ने शासन और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
कुसुमापुर निवासी 35 वर्षीय अर्जुन, जो लंबे समय से क्षेत्र में विद्युत लाइनों के अनुरक्षण का कार्य कर रहा था, मंगलवार को दौलतपुर में एलटी लाइन की मरम्मत हेतु खंभे पर चढ़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्जुन ने विभागीय प्रोटोकॉल के तहत शटडाउन लिया था, किंतु कार्य के मध्य ही विद्युत आपूर्ति एकाएक बहाल कर दी गई।
उच्च वोल्टेज के भीषण झटके ने अर्जुन को पल भर में झुलसा दिया और उसका निर्जीव शरीर विद्युत पोल के शीर्ष पर ही फंस गया। इस विचलित कर देने वाले दृश्य ने उपस्थित जनसमुदाय को स्तब्ध कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पुलिस बल और थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। काफी मशक्कत और परिजनों के आगमन के पश्चात शव को नीचे उतारा जा सका।
इस त्रासदी ने अब एक प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया है। जहाँ एक ओर विद्युत विभाग के एसडीओ विनोद शुक्ला मृतक को अपना कर्मचारी मानने से स्पष्ट इनकार कर रहे हैं, वहीं ग्राम प्रधान संजय सोमवंशी ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि अर्जुन दीर्घकाल से दैनिक वेतनभोगी के रूप में विभाग हेतु सेवाएं दे रहा था। यह विरोधाभास विभागीय उत्तरदायित्व से बचने का एक कुत्सित प्रयास प्रतीत होता है।
मृतक अपने पीछे विलाप करती वृद्ध माता, विधवा पत्नी और चार मासूम बच्चों का बिलखता परिवार छोड़ गया है। तहसीलदार शशांक सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच का आश्वासन दिया है, परंतु आक्रोशित ग्रामीणों की केवल एक ही मांग है—दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्यायोचित आर्थिक संबल।









