
रिपोर्ट हरदोई जिला संवाददाता परवेज खान
हरदोई मां और नवजात के स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की न्यूनतम छह प्रसवपूर्व जांच यानी एएनसी अनिवार्य की गई हैं। पहले यह संख्या चार थी।
परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. एच.डी. अग्रवाल ने इस संबंध में सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि नई व्यवस्था का मकसद स्वास्थ्य जोखिमों की समय पर पहचान और मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाना है। उन्होंने कहा कि छह जांचों से एनीमिया, जेस्टेशनल डायबिटीज, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों की जल्दी पहचान होगी और समय पर इलाज मिल सकेगा।
नोडल डॉ. अरविन्द सचान ने कहा कि अतिरिक्त जांचों से आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का गर्भवती महिलाओं से संपर्क बढ़ेगा। इस दौरान पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की गोली, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल पर परामर्श दिया जाएगा। परिवार को भी खतरे के लक्षणों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
पहली जांच पंजीकरण के तुरंत बाद, 12 सप्ताह के भीतर
दूसरी जांच 16 से 20 सप्ताह के बीच
तीसरी जांच 24 से 28 सप्ताह के बीच
चौथी जांच 28 से 32 सप्ताह के बीच
पाँचवीं जांच 32 से 36 सप्ताह के बीच
छठी जांच 36 से 40 सप्ताह के बीच
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह 1, 9, 16 और 24 तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष जांच होती है। वर्ष 2025-26 में जिले में 84,271 गर्भवतियों की जांच की गई, जिनमें 6090 उच्च जोखिम गर्भावस्था के मामले सामने आए। इन सभी की नियमित निगरानी कर जरूरत पड़ने पर उच्च केंद्रों पर रेफर किया गया।








