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हरदोई नवजात शिशु को माता का स्तनपान कराए जाने हेतु जागरूकता सप्ताह तथा मानसिक रोग व बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

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अनुराग मिश्रा

हरदोई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदोई के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश माननीय रीता कौशिक एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन/प्रभारी सचिव श्रीमती स्मिता गोस्वामी के मार्गदर्शन में आज दिनांक 01/08/2026 को तहसील विधिक सेवा समिति सदर हरदोई के सचिव/तहसीलदार श्री सचिंद्र कुमार शुक्ला के निर्देशन में जिला महिला अस्पताल हरदोई में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

 

शिविर की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुबोध सिंह ने की। शिविर में दो विषयों पर जानकारी दी गई। पहला विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत नवजात शिशु को माता का स्तनपान कराए जाने हेतु जागरूकता और दूसरा मानसिक रोग व बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कानूनी अधिकार तथा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग व बचाव।

 

कार्यक्रम में बताया गया कि नवजात शिशु को माता का दूध पिलाने के प्रति माताओं और समाज को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

परिवार नियोजन काउंसलर गरिमा शुक्ला ने शिविर में स्तनपान के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू किया जाना चाहिए। माँ के पहले पीले गाढ़े दूध कोलेस्ट्रम से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शुरुआती छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए, इस दौरान पानी या अन्य आहार नहीं देना चाहिए। स्तनपान से शिशु को दस्त, निमोनिया और कुपोषण जैसे संक्रमणों से बचाव होता है। साथ ही स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर, अंडाशय के कैंसर और प्रसवोत्तर कमजोरी का खतरा कम होता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए स्थानीय पौष्टिक आहार और संतुलित भोजन की जानकारी भी दी गई।

 

शिविर में लीगल एड क्लीनिक के श्यामू सिंह ने मानसिक रोग एवं बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को समाज में समान रूप से रहने, गरिमा के साथ जीवन जीने, बिना भेदभाव के समान अवसर, मुफ्त कानूनी सहायता और उचित स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने का अधिकार है। ये अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 39ए तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में निहित हैं। मानसिक या बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्ति भी समाज के पूर्ण सदस्य हैं और उन्हें सभी मानवीय अधिकार प्राप्त हैं।

 

इस अवसर पर नशीली दवाओं, शराब और तंबाकू के दुरुपयोग से होने वाले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभावों के बारे में भी बताया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जा रही नि:शुल्क विधिक सहायता हेतु टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी उपस्थित लोगों को दी गई।

 

शिविर में अस्पताल स्टाफ और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

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