
सीतापुर। जनपद में किसानों के साथ कथित रूप से किए जा रहे एक बड़े फर्जीवाड़े ने कृषि व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि डीएपी खाद की कमी का हवाला देकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है और प्रोम (PROM) खाद को डीएपी बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। यह कथित खेल अब खेतों तक पहुंच चुका है, जिससे सबसे अधिक नुकसान छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों को हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में सक्रिय कुछ निजी कंपनियों—जिनमें गांव कंपनी, वंशिका कंपनी, जैनियर कंपनी और जिनेवा क्रॉप साइंस के नाम सामने आ रहे हैं—पर इस कथित नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इनके एजेंट डीएपी उपलब्ध न होने की बात कहकर किसानों को वैकल्पिक खाद के रूप में प्रोम खाद थमा देते हैं और इसे डीएपी के समान प्रभावी बताकर बेचते हैं। किसान मजबूरी में इसे खरीद लेते हैं, लेकिन फसल पर अपेक्षित परिणाम न मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप कृषि विभाग से जुड़े एक लंबे समय से तैनात कर्मचारी की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उसकी कथित शह पर यह अवैध गतिविधि चल रही है और प्रभावशाली पहुंच के कारण निरीक्षण व कार्रवाई औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है।
किसानों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए न केवल भ्रामक तरीके से खाद बेची जा रही है, बल्कि अवैध वसूली भी की जा रही है, जिसके बाद कथित तौर पर आपसी बंटवारा किया जाता है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा, या फिर किसानों की मेहनत और पूंजी इसी तरह कथित खाद माफिया की भेंट चढ़ती रहेगी। किसानों ने मामले में ठोस कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।









