

वर्ष 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। लंबे अंतराल के बाद 5 फरवरी 2026 से विवाह के शुभ मुहूर्तों की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, वर्ष 2026 में कुल 59 शुभ विवाह मुहूर्त बन रहे हैं, जबकि 6 दिसंबर 2026 को वर्ष का अंतिम विवाह मुहूर्त रहेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष की शुरुआत में विवाह मुहूर्त इसलिए नहीं बने, क्योंकि शुक्र ग्रह अस्त अवस्था में थे। 9 दिसंबर 2025 को अस्त हुए शुक्र ग्रह 1 फरवरी 2026 तक अस्त रहे, जिसके कारण जनवरी माह में विवाह वर्जित रहा। 4 फरवरी को शुक्र के उदय के बाद 5 फरवरी से पुनः विवाह संभव हो सका।
खरमास, होलाष्टक और चातुर्मास बनेंगे बाधा
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, फरवरी और मार्च के शुरुआती दिनों में विवाह के योग बनेंगे, लेकिन फरवरी के अंत से 4 मार्च तक होलाष्टक रहेगा, जिसमें विवाह नहीं किए जाते। इसके बाद 14 मार्च 2026 से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ खरमास प्रारंभ होगा, जो 13 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य, विशेषकर विवाह, वर्जित माने जाते हैं।
वहीं वैदिक परंपरा के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास रहता है। वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को पड़ेगी। इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए विवाह सहित सभी शुभ कार्य बंद रहते हैं। 21 नवंबर 2026 से पुनः विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।
गुरु-शुक्र का विशेष महत्व
नीतिका शर्मा ने बताया कि विवाह मुहूर्त निर्धारण में गुरु और शुक्र ग्रह का उदय अत्यंत आवश्यक है। गुरु को विवाह, संतान, ज्ञान और सौभाग्य का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र दांपत्य जीवन, प्रेम और वैवाहिक सुख का प्रतीक है। इनमें से किसी एक के अस्त होने पर विवाह शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। साथ ही त्रिबल शुद्धि—सूर्य, चंद्र और गुरु की अनुकूल गोचर स्थिति—भी अनिवार्य होती है।
2026 में माहवार शुभ विवाह मुहूर्त
फरवरी: 12 मुहूर्त
मार्च: 8 मुहूर्त
अप्रैल: 8 मुहूर्त
मई: 8 मुहूर्त
जून: 7 मुहूर्त
जुलाई: 4 मुहूर्त
नवंबर: 4 मुहूर्त
दिसंबर: 8 मुहूर्त
प्रमुख शुभ तिथियां
फरवरी 2026: 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25, 26
मार्च 2026: 1, 3, 4, 7, 8, 9, 11, 12
अप्रैल 2026: 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई 2026: 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
जून 2026: 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई 2026: 1, 6, 7, 11
नवंबर 2026: 21, 24, 25, 26
दिसंबर 2026: 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12
(कुछ पंचांगों में तिथियों में आंशिक अंतर संभव है।)
विवाह का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में विवाह को षोडश संस्कारों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। विवाह के माध्यम से व्यक्ति गृहस्थाश्रम में प्रवेश करता है। यह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और आने वाली पीढ़ियों का पवित्र बंधन माना जाता है। इसी कारण शास्त्रों में विवाह के लिए शुभ तिथि, ग्रह-नक्षत्र और लग्न का विशेष महत्व बताया गया है।









