
लखनऊ से एक अहम राजनीतिक खबर सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि बीते करीब दो महीनों से इस विषय पर विचार चल रहा था और अंततः अपने समर्थकों के साथ चर्चा के बाद कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया गया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का दावा है कि उनके साथ कुल 73 लोगों ने भी पार्टी से इस्तीफा दिया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में हजारों समर्थकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कांग्रेस को जातिवाद और संप्रदायवाद के खिलाफ संघर्ष के उद्देश्य से जॉइन किया था, लेकिन पार्टी में रहते हुए इस लड़ाई को वे प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वे अपने समर्थकों के साथ बैठकर आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे और जल्द ही भविष्य को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नसीमुद्दीन सिद्दीकी का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी मजबूत पहचान रही है, खासकर पश्चिमी यूपी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनके अलग होने से कांग्रेस की आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।









