
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब वर्ष 2026 में नहीं कराए जाएंगे। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही संपन्न कराए जाएंगे। इस निर्णय के बाद पंचायत चुनाव पहले कराए जाने की संभावनाओं पर विराम लग गया है।
सरकार की ओर से बताया गया है कि पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण यह निर्णय लेना पड़ा। आयोग की रिपोर्ट समय पर उपलब्ध न होने से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के बिना चुनाव कराना संभव नहीं था। ऐसे में दोनों चुनाव एक साथ कराने का विकल्प चुना गया।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे और आयोग के गठन की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सदस्यों की नियुक्ति कर दी जाएगी। उनके अनुसार, यह कदम प्रदेश के विकास और पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2027 में अब पंचायत और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। इससे राजनीतिक दलों की रणनीति में बदलाव संभव है। पंचायत चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं की भूमिका विधानसभा चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकती है।
विपक्ष ने इस निर्णय का विरोध किया है। अखिलेश यादव ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि यह पिछड़े वर्गों के हितों के खिलाफ है और फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
वहीं सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश में सुशासन और मजबूत पंचायती राज प्रणाली के लिए आवश्यक है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार प्रदेश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।









