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सीतापुर खेत बचाओ अभियान” का असर टिकौली-गनेरा में वैज्ञानिकों ने किसानों को सिखाए खेती के नए गुर कम लागत, ज्यादा पैदावार का फॉर्मूला बताया – यूरिया-डीएपी कम जैविक खेती ज्यादा

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Written by
मनोज मिश्रा

सीतापुर सिंधौली कृषि विभाग का खेत बचाओ अभियान अब गांव-गांव दस्तक दे रहा है। इसी कड़ी में सिधौली के टिकौली और गनेरा ग्राम पंचायत में किसानों की खास गोष्ठी आयोजित की गई, जहां कृषि वैज्ञानिकों ने खेत की ताकत बढ़ाने के देसी-विदेशी नुस्खे बताए।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने किसानों को समझाया कि मिट्टी की उर्वरकता कैसे बचाई जाए। उन्होंने बताया कि बिना मिट्टी के, खेती संभव नहीं – इसलिए खेत को “जिंदा” रखना सबसे जरूरी है।

 

मृदा लवणता अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके झा और सहायक विकास अधिकारी कृषि संतोष कुमार यादव ने किसानों को उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया। मतलब साफ – अंधाधुंध यूरिया-डीएपी डालने से खेत बंजर हो रहा है। साथ ही उन्होंने प्राकृतिक जैविक खेती को अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की जानकारी दी।

 

गोष्ठी में किसानों को बीज प्रमाणीकरण बीज संवर्धन भूमि शोधन और बीज शोधन जैसी तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि बीज को बोने से पहले सही तरीके से उपचारित करने पर फसल की बीमारियां आधी हो जाती हैं और पैदावार बढ़ जाती है।

एडीओ कृषि संतोष यादव ने बताया कि ये खेत बचाओ अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे जिले में चल रहा है। हर ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि विभाग के अधिकारी चौपाल और गोष्ठी करके किसानों को जागरूक कर रहे हैं।

 

अभियान का मूल मंत्र है कम लागत में ज्यादा उत्पादन इसके लिए किसानों को यूरिया-डीएपी का प्रयोग कम करने, भूमि और बीज शोधन करने, और जैविक खेती अपनाने पर फोकस किया जा रहा है।

 

किसानों ने भी वैज्ञानिकों की बातें ध्यान से सुनीं और अपने खेतों की मिट्टी-फसल की समस्याएं साझा कीं।

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