
शाहजहांपुर। जिले में “जीरो टॉलरेंस” की बात करने वाली सरकार के दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब नियमों का पालन कराने वाले पुलिसकर्मियों को ही सजा भुगतनी पड़ी। हाईवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चलाए जा रहे सेफ्टी अभियान के दौरान बिना हेलमेट एक व्यक्ति का चालान काटना दारोगा और सिपाही को भारी पड़ गया। कथित तौर पर “माननीय” के करीबी का चालान होने पर दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक द्वारा हाईवे पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए “क्रिटिकल कॉरिडोर टीम” (CC टीम) का गठन किया गया था, जिसका प्रभारी उप निरीक्षक अनुज चौधरी को बनाया गया था। 27 जून की शाम करीब 5 बजे नगरिया मोड़ पर टीम सेफ्टी अभियान के तहत चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान रायखेड़ा निवासी एक व्यक्ति को बिना हेलमेट बाइक चलाते पकड़ा गया और नियमानुसार एक हजार रुपये का चालान कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, चालान कटते ही व्यक्ति ने “माननीय के प्रतिनिधि” को फोन लगा दिया। आरोप है कि इसके तुरंत बाद उच्चाधिकारियों पर दबाव बनाया गया और टीम प्रभारी उप निरीक्षक अनुज चौधरी व कांस्टेबल सुमित सैनी को लाइन हाजिर करने का फरमान जारी कर दिया गया।
पुलिस महकमे में चर्चा है कि यह पहला मामला नहीं है जब शाहजहांपुर में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई गई हों। एक तरफ अधिकारी हाईवे पर सुरक्षा के लिए प्लान बनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके निर्देशों का पालन करने वाले पुलिसकर्मियों को ही कार्रवाई झेलनी पड़ती है।
नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि अब पूरे जनपद में खाकी के सामने धर्मसंकट है— “करें तो क्या करें?”। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से पुलिसकर्मियों का मनोबल टूट रहा है और कई कर्मी शाहजहांपुर से तबादला कराने की जुगत में लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्ता के रसूख के आगे कानून व्यवस्था का मजाक बनाया जा रहा है, जिसका खामियाजा छोटे पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आम जनता को भी भुगतना पड़ रहा है। सड़क हादसों में रोजाना लोग मर रहे हैं, लेकिन हेलमेट चेकिंग पर भी राजनीति हावी है।
*सह संपादक*: चन्दन सिंह









