
कन्नौज आयुर्वेदिक चिकित्सा की महान विभूति और च्यवनप्राश की परंपरा से जुड़े महर्षि च्यवन की कन्नौज स्थित तपोस्थली अब पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने च्यवन ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना के तहत कन्नौज जिले के विधानसभा क्षेत्र छिबरामऊ के विकासखंड गुगरापुर स्थित च्यवन ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 81.35 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली है। परियोजना के तहत आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कन्नौज स्थित च्यवन ऋषि आश्रम भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की महत्वपूर्ण धरोहर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि च्यवन ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। आयुर्वेद में विशेष स्थान रखने वाले ऋषि च्यवन का नाम च्यवनप्राश के माध्यम से आज भी घर-घर में जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले इस स्थल के पर्यटन विकास से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह स्थल और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।
आश्रम में विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
च्यवन ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए पहली किस्त के रूप में 61 लाख रुपये जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) की ओर से प्रस्तावित कार्यों में पर्यटकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
आश्रम के निकट बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण कराया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। परिसर में रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट, आगंतुकों के बैठने के लिए आरसीसी बेंच तथा विभिन्न स्थानों की जानकारी और दिशा-निर्देशन के लिए साइनेज लगाए जाएंगे।
पर्यटन विभाग का उद्देश्य आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
च्यवन ऋषि की तपोभूमि से जुड़ी है पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कन्नौज स्थित च्यवन ऋषि आश्रम वही तपोभूमि है, जहां महर्षि च्यवन ने लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि तपस्या के दौरान उनके चारों ओर दीमक का विशाल टीला बन गया था। इसी स्थान से राजकुमारी सुकन्या से जुड़ी प्रसिद्ध कथा भी बताई जाती है।
कहा जाता है कि सुकन्या की सेवा और समर्पण तथा अश्विनी कुमारों के दिव्य आशीर्वाद से महर्षि च्यवन को पुनः यौवन और दृष्टि प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद और मानव स्वास्थ्य के कल्याण के लिए शोध कार्य किया। मान्यता है कि इसी ज्ञान परंपरा से च्यवनप्राश जैसे आयुर्वेदिक योग का उद्भव हुआ।
इसी वजह से च्यवन ऋषि आश्रम को भारतीय ऋषि परंपरा, आयुर्वेदिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
कन्नौज के अन्य पर्यटन स्थल भी आकर्षण का केंद्र
पर्यटन मंत्री के अनुसार कन्नौज आने वाले पर्यटकों के लिए च्यवन ऋषि आश्रम के अलावा जिले के कई अन्य पर्यटन एवं धार्मिक स्थल भी आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें लाख बहोसी पक्षी अभ्यारण्य, कन्नौज पुरातात्विक संग्रहालय, तिर्वा स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर, गंगा तट का मेहंदी घाट, स्वयंभू बाबा गौरी शंकर मंदिर तथा 52 खंभों वाली मकदूम जहानिया प्रमुख हैं।
जिले के विभिन्न पर्यटन, धार्मिक और विरासत स्थलों की ओर पर्यटकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 21.73 लाख से अधिक पर्यटक कन्नौज पहुंचे, जो जिले की बढ़ती पर्यटन संभावनाओं को दर्शाता है।
च्यवन ऋषि आश्रम के विकास के बाद कन्नौज में आध्यात्मिक, धार्मिक और विरासत पर्यटन को और गति मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है।










