
हरदोई जिला संवाददाता हर्ष वाजपेई की रिपोर्ट
हरदोई विकासखंड साड़ी के अंतर्गत नयागांव स्थित गौशाला में लापरवाही और बदइंतजामी ने सारी हदें पार कर दी हैं। गौशाला के अंदर का मंजर देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। यहां एक-दो नहीं बल्कि कई गोवंश मृत अवस्था में पड़े हैं, जिन्हें लीपापोती के लिए तिरपाल से ढक दिया गया है। खुले में पड़े शव को आवारा कुत्ते नोच रहे हैं और पूरे परिसर में तेज दुर्गंध फैली हुई है।


सोमवार को जब पड़ताल की गई तो गौशाला में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई। सरकारी रजिस्टर में 50 से अधिक गोवंश दर्ज हैं, लेकिन मौके पर गिनती करने पर परिसर में सिर्फ 39 जानवर ही मिले। बाकी 11 से ज्यादा जानवर कहां गए, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। जो 39 गोवंश मिले भी, उनकी हालत देखकर साफ लग रहा है कि भूख-प्यास और बीमारी के कारण वे भी ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाएंगे। कई गायें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि जमीन पर पड़ी हैं और उठने तक की ताकत नहीं बची है।


गौशाला में गायों के खाने के लिए बनी चरनियों की हालत और भी खराब है। कई दिनों से चरनी में हरा चारा नहीं डाला गया। चरनी में सिर्फ सूखा भूसा पड़ा है, उसमें भी गोबर भरा हुआ है। पानी के लिए बनी नादें भी सूखी पड़ी हैं। आलम यह है कि दोपहर 11 बजे तक गौशाला में किसी भी जानवर को चारा-पानी नहीं मिला था।

जब इस गंभीर मामले में ग्राम प्रधान से फोन पर जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने जवाब देने के बजाय उल्टा पत्रकार को धमकाना शुरू कर दिया। वहीं गौशाला की देखरेख के लिए तैनात केयरटेकर ने भी बदतमीजी से बात की। कैमरे के सामने केयरटेकर साफ बोला, “गौशाला का पैसा मुझे कुछ नहीं मिलता, मैं क्यों परेशान होऊं।” स्थानीय लोगों के मुताबिक केयरटेकर दिनभर इधर-उधर घूमता रहता है और गोवंश भगवान भरोसे पड़े रहते हैं।
बताया जा रहा है कि शासन से गौशाला के संचालन के लिए हजारों रुपये का बजट आता है, लेकिन धरातल पर एक भी पैसा गोवंश पर खर्च होता नहीं दिख रहा। न समय से चारा आता है, न इलाज की व्यवस्था है। मृत गोवंश को भी समय से दफनाया नहीं जाता, जिससे संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।









