
लखनऊ के जियामऊ स्थित एक प्राइवेट कैंसर अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा ₹61,000 का बिल बकाया होने की बात कहकर शव को बंधक बनाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है।
मृतक की शिनाख्त अमेठी जिले के जगदीशपुर (BHEL क्षेत्र) के उतेलवा गांव निवासी प्रदीप शर्मा के रूप में हुई है, जिनकी रीढ़ की हड्डी में कैंसर का इलाज चल रहा था और गुरुवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

मृतक के बहनोई संदीप शर्मा ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 22 मई को भर्ती कराने के बाद महज 6 दिनों के इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन उनसे करीब ₹5.20 लाख वसूल चुका था।
परिजनों का कहना है कि प्रदीप के नाम कोई जमीन-जायदाद भी नहीं है और उनके इलाज का पूरा खर्च ईएसआई (ESI) के जरिए उठाया जा रहा था, इसके बावजूद अस्पताल के कर्मचारियों ने बिना ₹61,000 जमा किए शव देने से साफ मना कर दिया।
इस अमानवीय व्यवहार को लेकर परिजनों और रिश्तेदारों का गुस्सा भड़क गया और अस्पताल परिसर में भारी आक्रोश देखने को मिला।
हंगामा बढ़ने और मामले की जानकारी बाहर आते ही कुछ रसूखदार व माननीय लोगों के फोन अस्पताल प्रशासन के पास पहुंचने लगे, जिसके बाद बैकफुट पर आए अस्पताल प्रबंधन ने बिना पेमेंट लिए ही शव को परिजनों को सौंप दिया।
परिजनों ने बताया कि शव मिल जाने के बाद अब वे इस मामले में पुलिस या प्रशासन से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराना चाहते हैं।
इस पूरे प्रकरण पर लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के प्राइवेट हॉस्पिटल नोडल अधिकारी डॉ. ए.पी. सिंह ने कहा कि पेमेंट के लिए शव रोके जाने की कोई लिखित शिकायत अभी तक नहीं मिली है, यदि पीड़ित पक्ष शिकायत करता है तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।









