
हरदोई बिलग्राम प्रदेश सरकार भले ही ‘जनसुनवाई’ में लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करे, लेकिन बिलग्राम तहसील में राजस्व कर्मी डीएम-एसडीएम के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी ग्राम श्यामपुर में पीड़ित की जमीन की मेड़बंदी नहीं हो सकी।
मामला परगना मल्लावां के ग्राम श्यामपुर का है। पीड़ित दिवाकर मिश्रा ने भूमि की मेड़बंदी के लिए न्यायालय उपजिलाधिकारी बिलग्राम में वाद दायर किया था। एसडीएम बिलग्राम ने 28 मई 2025 को दो सप्ताह में पैमाइश कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया। आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर एसडीएम ने 22 नवंबर 2025 को दोबारा निर्देश दिए। इसके बाद 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी हरदोई ने भी कड़े निर्देश जारी किए। लेकिन राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। पीड़ित लगातार दफ्तरों के चक्कर काटता रहा।
मई 2026 में तहसीलदार को 72 घंटे में निस्तारण का अल्टीमेटम मिला। दबाव में राजस्व टीम मौके पर पहुंची। नाप-जोख कर मेड़ बना दी गई। लेकिन टीम के लौटते ही रामलखन त्रिपाठी, उमाकान्त शुक्ला और अन्य लोगों ने सरकारी नाप से बनी मेड़ को उखाड़ दिया और खेत जोत डाला।
पीड़ित ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40015526022085, 20015526022250 और 20015526024152 दर्ज कराई हैं। सभी शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
जब राजस्व टीम द्वारा बनाई गई मेड़ ही सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की जमीन कैसे बचेगी। पीड़ित का कहना है कि भूमाफियाओं को तहसील के निचले स्टाफ का संरक्षण प्राप्त है। अब देखना है कि जिलाधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।









