
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं और कई स्थानों पर लोग रात तीन बजे से ही सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। बुकिंग कराने के बाद भी चार से पांच दिन तक सिलेंडर न मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कानपुर, उन्नाव, देवरिया, गोंडा और मऊ समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी गई। कुछ जगहों पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गैस या पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही गैस की कमी को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को लगातार निगरानी रखने को कहा है।
जानकारों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित कर दी है। इसका असर होटल, ढाबा और रेस्तरां कारोबार पर भी पड़ रहा है।
प्रदेश में लगभग 4.26 करोड़ घरेलू एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें उज्ज्वला योजना के तहत करीब 1.87 करोड़ कनेक्शन शामिल हैं। औसतन प्रतिदिन 5 से 6 लाख सिलेंडरों की खपत होती है। अधिकारियों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है और गैस आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।









