
लखनऊ सार्वजनिक वितरण प्रणाली PDS को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले कोटेदारों ने अब कमीशन में एकरूपता की मांग तेज कर दी है। कोटेदार संगठनों का कहना है कि जब सरकार “वन नेशन, वन राशन कार्ड” सफलतापूर्वक लागू कर सकती है तो “वन नेशन, वन कमीशन” की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।
प्रदेश भर के कोटेदारों का आरोप है कि उनसे राशन वितरण के अलावा ई-केवाईसी, लाभार्थी सत्यापन, सर्वेक्षण, पोर्टेबिलिटी और शिकायत निस्तारण जैसे कई अतिरिक्त काम भी कराए जा रहे हैं। इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उनके मानदेय और कमीशन की दर हर राज्य में अलग है। उत्तर प्रदेश में कमीशन कई राज्यों की तुलना में कम है और वह भी समय पर नहीं मिलता।
उत्तर प्रदेश कोटेदार संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कोटेदार पूरी निष्ठा से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रहे हैं। इससे सरकार की छवि मजबूत हो रही है। लेकिन सम्मानजनक पारिश्रमिक न मिलने से कोटेदार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई जिलों में 4 से 6 महीने का कमीशन बकाया है।
1 पूरे देश में कोटेदारों के लिए समान लाभांश दर तय की जाए।
2. हर माह की निश्चित तारीख तक कमीशन खाते में भेजा जाए।
3. ई-केवाईसी और सर्वे जैसे कार्यों के लिए अलग मानदेय दिया जाए।
4. सभी लंबित भुगतान 30 दिन में किए जाएं।
कोटेदार संघ ने सरकार और प्रशासन से सकारात्मक पहल की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
खाद्य एवं रसद विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कमीशन का मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। राज्य और केंद्र की संयुक्त योजना होने के कारण दरों में अंतर आता है। फिर भी कोटेदारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।








