
बिहार से अशोक कुमार की रिपोर्ट
पटना बिहार की सियासत ने मंगलवार 14 अप्रैल 2026* को एक नया अध्याय शुरू कर दिया। लगभग 20 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे नीतीश कुमार के पद छोड़ने के साथ ही राज्य में एक राजनीतिक दौर समाप्त हो गया। अब कमान भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी के हाथ में होगी।
भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना है। वे आज बुधवार सुबह 11 बजे राजभवन में बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे।
मुंगेर के लखनपुर में 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी का सियासी सफर पुराना है। पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्य थे और मां पार्वती देवी विधायक रह चुकी हैं। सम्राट ने 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव के साथ राजनीति शुरू की। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में वे सबसे युवा मंत्री बने। 2018 में भाजपा का दामन थामना उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ।
उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री रहते सम्राट चौधरी ने सख्त प्रशासक की छवि बनाई। उनका साफ संदेश था- “अपराध छोड़ो या बिहार छोड़ो।” बेगूसराय में गैंगस्टर शिवदत्त राय पर शिकंजा, महिलाओं के लिए ‘अभय ब्रिगेड’ और ‘पिंक पुलिसिंग’ जैसे कदमों से उन्होंने जनता का भरोसा जीता। अवैध खनन और भू-माफिया पर कार्रवाई कर वे ‘सुशासन’ का नया चेहरा बनकर उभरे।
कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने बड़ा सियासी दांव चला है। नीतीश कुमार के ‘लव-कुश’ वोट बैंक में सेंध लगाने की यह रणनीति मानी जा रही है। ओबीसी वर्ग में मजबूत पकड़ रखने वाले सम्राट चौधरी आने वाले चुनाव में एनडीए के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं।
आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की विकास यात्रा किस दिशा में जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।









