
रिपोर्ट अमृतपुर तहसील संवाददाता कुलदीप
शुरुआती 100 विद्यार्थियों को 60 से 100% तक मिल रही छात्रवृत्ति, योगी सरकार की प्रयास से यूपी बन रहा शिक्षा का हब
फर्रुखाबाद में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल हुई है।जिले के होनहारों को IIT-JEE और NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा या कानपुर जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। फर्रुखाबाद के बढ़पुर रोड पर ‘आचार्य इंस्टीट्यूट’ की नई शाखा का भव्य उद्घाटन संस्थान के संस्थापक एवं सीईओ संदीप द्विवेदी ने किया।

अब घर बैठे इंडिया की टॉप-टियर एजुकेशन मिलेगी।
उद्घाटन के दौरान संस्था के फर्रुखाबाद डायरेक्टर शंशाक सिंह राठौड़ ने बताया कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य फर्रुखाबाद के छात्रों को वही उच्च स्तरीय संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करना है, जिसके लिए छात्र अब तक बाहर जाते थे। उन्होंने कहा, “हमारा ट्रैक रिकॉर्ड टॉपर देने का रहा है और अब यही सफलता की कहानी फर्रुखाबाद के बच्चे लिखेंगे।

अचार्य इंस्टीट्यूट के सीईओ संदीप द्विवेदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि NEET एन्ड JE मेंस के जो बड़े इंस्टिट्यूट होते हैं बो ज्यादातर महानगरों के लिए अप्रोच करते हैं। वहां पर पैनल ज्यादा होते हैं। क्योंकि वहां पर क्राउड ज्यादा होता है। लेकिन बहुत कम बड़े इंस्टिट्यूट हैं जो छोटे शहरों या सिटी क्या उससे नीचे लेवल की सिटी है जहां एजुकेशन लेवल बहुत कम है। वहां पर उनका फोकस थोड़ा कम जाता है। शुरू से ही अचार्य इंस्टीट्यूट 2021 से ही रीजन रहा है कि हम उन छोटी जगहों पर पहुंचेंगे जहां ऐसी क्वालिटी पहुंचने में जहां अभी दो-चार साल और लगेंगे। इस विजन के तहत फर्रुखाबाद में हमारा अप का पहला सेंटर है। यहां पर हमारा दोस्त है शशांक सर जो हमारे साथ बहुत समय से इंस्टिट्यूट में पढ़ा भी रहा था। इसका विजन पहले से ही था कि हमको यूपी में जाना है और हम खुद भी प्रयागराज से हूं। यह हमारे सौभाग्य की बात है कि फर्रुखाबाद से हमने इसकी शुरुआत की है। इंस्टिट्यूट का विजन भी यही रहेगा कि लो कॉस्ट एवं विनर एजुकेशन को हम हमेशा प्रमोट करते हैं। क्योंकि कहीं न कहीं जो चीज रिजल्ट एंड इस टाइप क्वालिटी क्वालिटी देने के लिए जी लेवल पर कोस्ट किया जाता है। उसके आगे कास्ट के लेवल में बेहतर रिजल्ट देते हैं। यहां तक की अभी तक आप देखेंगे कि छत्तीसगढ़ में आप देखेंगे तो हम छत्तीसगढ़ में टॉपर मेंटेनेंस किए हुए हैं। और हर साल जो रिजल्ट है वह हेंस होता है। जिससे कहीं-कहीं बच्चा बाहर छोटी-छोटी सिटी छोड़कर बड़ी सिटी में जाता है। 1 जो उनकी लिमिटेशन है उससे भी ज्यादा पैसा वह वहां पर देते हैं। तब भी सिलेक्शन की कोई गारंटी नहीं है। बहुत सारी चीज यहां पर फर्रुखाबाद में मिलें यही हमारा विजन है कि यहीं रहकर यही पढ़ कर बच्चे पड़े वह ज्यादा बेहतर है।
एक के सवाल के जवाब में बताया कि हम खुद प्रयागराज यूपी से बिलॉन्ग करते हैं हम तो सरकार को बहुत अच्छे से जानते हैं, वह एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तो कर ही रही है यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है हम क्राउड फील कर रहे हैं, जो युवा लोग हैं और ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो अपने यूपी के हैं और अप को बढ़ाने के लिए वह सपोर्ट कर रहे हैं। हमें लगता कि अभी हम फर्रुखाबाद आ रहे हैं। अभी तक हमने जितनी भी शुरुआत की है उसमें बहुत अच्छा सपोर्ट मिला है आगे मुझे आशा भी रहेगी की सपोर्ट हमेशा मेंटेन रहेगा। जिससे कि यहां की क्वालिटी बढ़ाने में मैक्सिमम सबवे इंस्टिट्यूट को दे पाए।









