
उत्तर प्रदेश के हरदोई और कन्नौज जनपदों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित एक महत्वपूर्ण रेल परियोजना को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। रेल मंत्रालय ने हरदोई–गुरसहायगंज वाया सांडी नई रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर दी है। करीब 63.70 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर लगभग 1,481 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जो पहले प्रस्तावित 1,302 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस परियोजना की पृष्ठभूमि काफी लंबी रही है। सांडी रेल लाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने वर्षों तक धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और दिल्ली के जंतर-मंतर तक आवाज उठाकर इस रेल लाइन की मांग की। वर्ष 2021 में परियोजना का ड्रोन सर्वे पूरा किया गया, जबकि जनवरी 2022 में रूट का सीमांकन कार्य भी समाप्त हो गया था। यह परियोजना 2019-20 से उत्तर रेलवे की पिंक बुक में दर्ज थी और लगातार कई रेल बजटों में प्राथमिकता के रूप में शामिल रही।
नई रेल लाइन पर कुल नौ स्टेशनों का प्रस्ताव है, जिनमें हरदोई (करना), हरदोई ब्लॉक हट, कुतवापुर, पिंडारी, सांडी, भदार, सिया, चचासांडा और गुरसहायगंज शामिल हैं। इन स्टेशनों के निर्माण से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी, जिससे आवागमन आसान होगा और स्थानीय व्यापार व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इस नई रेल लाइन के शुरू होने से यात्रा समय में भी बड़ी कमी आएगी। वर्तमान में गुरसहायगंज पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है, जबकि नई लाइन के माध्यम से कम समय और कम खर्च में यात्रा संभव हो सकेगी। साथ ही कन्नौज-फर्रुखाबाद-हरदोई क्षेत्र के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से आर्थिक गतिविधियों और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलेगा।
रेल मंत्रालय ने फाइनल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में संशोधित लागत को शामिल कर लिया है। अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह परियोजना न केवल दो जिलों को बेहतर तरीके से जोड़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस ऐतिहासिक स्वीकृति के बाद हरदोई–गुरसहायगंज वाया सांडी रेल लाइन को क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई राह खोलने वाला कदम माना जा रहा है।









