तहसील संवाददाता अमृतपुर कुलदीप की रिपोर्ट –
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर ब्लॉक से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या हम वाकई विकास के हकदार हैं? यहाँ महीनों के इंतजार और शिकायतों के बाद जब सड़क का निर्माण शुरू हुआ, तो स्थानीय लोगों की लापरवाही ही उस पर भारी पड़ने लगी है। फर्रुखाबाद का राजेपुर ब्लॉक। यहाँ की जनता महीनों से जर्जर सड़कों और धूल के गुबार से परेशान थी। लोग आए दिन प्रशासन को कोसते थे और सोशल मीडिया पर खराब सड़कों की तस्वीरें साझा कर गुस्सा जाहिर करते थे। कड़ी मशक्कत और बजट पास होने के बाद आखिरकार प्रशासन ने यहाँ सीमेंटेड (RCC) रोड का निर्माण कार्य शुरू कराया।
लेकिन अफ़सोस! जिस सड़क को पूरी तरह सूखने और पक्का होने में कुछ समय चाहिए था, उसी ताजी बनी सीमेंटेड रोड पर लोगों ने चार पहिया वाहन दौड़ाने शुरू कर दिए। एक को देखकर दूसरे ने भी वही गलती दोहराई।
“विडंबना देखिए, जब सड़क खराब थी तो दोष प्रशासन का था, लेकिन जब सड़क बन रही है तो उसे खराब करने की जिम्मेदारी खुद जनता ने ले ली है। ताजी सीमेंट पर टायरों के निशान न केवल सड़क की मजबूती को खत्म कर रहे हैं, बल्कि सरकारी धन की भी बर्बादी कर रहे हैं।”
प्रशासनिक अनदेखी नहीं, जनता की गलती: सड़क पूरी तरह सेट होने से पहले ही भारी वाहनों का आवागमन शुरू।
विकास पर फिर रहा पानी: लाखों की लागत से बन रही सड़क बनने के साथ ही उखड़ने की कगार पर।

नियमों की धज्जियां: निर्माण कार्य के लिए लगाए गए अवरोधकों (Barricades) को हटाकर निकल रहे हैं लोग।
अगर सड़क बनने के दूसरे दिन ही टूट जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या फिर से प्रशासन को ही कटघरे में खड़ा किया जाएगा? राजेपुर के जागरूक नागरिकों को यह समझना होगा कि यह सड़क उनकी सुविधा के लिए है। अगर आज थोड़ा धैर्य नहीं रखा, तो आने वाले कई सालों तक फिर उसी गड्ढे वाली सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”









