
हरदोई (कासिमपुर)।
गर्मी के इस सीजन में अगर आप भी गूगल पर एसी (AC) सर्विसिंग के लिए कस्टमर केयर का नंबर ढूंढ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! जरा सी चूक आपको कंगाल बना सकती है। ऐसा ही एक दिलदहला देने वाला मामला हरदोई जनपद के थाना कासिमपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक महिला को गूगल से नंबर निकालना जिंदगी भर का दर्द दे गया। शातिर साइबर अपराधियों ने महज ₹5 के फेर में फंसाकर महिला के बैंक खाते से ₹78,999 साफ कर दिए।
जानकारी के मुताबिक, कासिमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गौसगंज की रहने वाली श्रीमती देवी (पुत्री ठाकुरी प्रसाद) ने बीते 24 जून 2026 को अपने घर का एसी ठीक कराने के लिए गूगल पर सर्च किया। वहाँ उन्हें एक तथाकथित टोल-फ्री नंबर (1800-412-2637) मिला।
नंबर पर संपर्क करते ही जालसाजों का तंत्र सक्रिय हो गया। ठगों ने व्हाट्सएप पर पीड़िता से संपर्क साधा और बेहद शातिराना अंदाज में विश्वास जीता। उन्होंने कहा कि:
“मैडम, कुल सर्विस चार्ज ₹250 है। अभी रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ ₹5 ऑनलाइन जमा करने होंगे, बाकी के पैसे इंजीनियर के आने पर दे दीजिएगा।
ठगों के झांसे में आकर पीड़िता ने उनके भेजे एक अज्ञात लिंक पर अपनी निजी जानकारी भर दी। उन्हें भनक तक नहीं थी कि यह लिंक उनके बैंक खाते की ‘डेथ वारंट’ था।
शातिर अपराधियों ने तीन दिन तक महिला को अपनी मीठी बातों में उलझाए रखा और फिर 27 जून 2026 की सुबह करीब 9:04 बजे अपना असली रंग दिखाया। ठगों ने पलक झपकते ही यूपीआई (UPI) के जरिए दो किस्तों में—पहले ₹49,999.99 और फिर ₹28,999.99 (कुल ₹78,999.98)—महिला के खाते से उड़ा लिए। जब तक मोबाइल पर मैसेज आया, तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी थी।
खाता खाली होने के बाद पीड़िता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना वक्त गंवाए तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर गुहार लगाई और थाना कासिमपुर में लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से जालसाजों के इस गिरोह को दबोचने के लिए जाल बिछा दिया है।इस वारदात के बाद पुलिस प्रशासन ने आम जनता के लिए सख्त हिदायत जारी की है

गूगल के नंबरों पर अंधविश्वास न करें: गूगल पर मौजूद 90% कस्टमर केयर या टोल-फ्री नंबर फर्जी और ठगों द्वारा डाले गए होते हैं। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही रुख करें।
₹1 या ₹5 के लिंक से बचें: कोई भी असली कंपनी एडवांस रजिस्ट्रेशन के नाम पर ऐसे संदिग्ध लिंक नहीं भेजती।
ओटीपी और यूपीआई पिन है सीक्रेट: अपना पिन या पासवर्ड किसी से साझा न करें।
अगर आप भी शिकार होते हैं: तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत 1930 पर कॉल करें, ताकि समय रहते पैसे होल्ड किए जा सकें।
लखनऊ मंडल ब्यूरो चीफ – अनुराग सिंह









