
कन्नौज राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत फाइलेरिया रोगियों की बेहतर देखभाल एवं रोगजनित विकलांगता की रोकथाम के उद्देश्य से मार्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) गतिविधि के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं पेशेंट सेल्फ-केयर डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विकास चन्द्रा ने की। इस दौरान हाथीपांव (लिम्फेडेमा) से प्रभावित छह रोगियों को एमएमडीपी किट वितरित की गई। साथ ही किट के सही एवं नियमित उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन कराते हुए रोगियों को स्व-देखभाल के महत्व और उसके लाभों की जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया एक दीर्घकालिक बीमारी है, लेकिन नियमित स्वच्छता, प्रभावित अंग की उचित देखभाल, चिकित्सकीय परामर्श और एमएमडीपी किट के नियमित उपयोग से इसकी जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रोगियों को स्व-देखभाल के प्रति जागरूक बनाना इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के माध्यम से चिन्हित फाइलेरिया रोगियों के लिए एमएमडीपी शिविर आयोजित किए जाएं तथा पात्र रोगियों को समयबद्ध तरीके से एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें उपचार और आवश्यक परामर्श मिल सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डाॅ. बृजेश शुक्ला (वीबीडी नोडल अधिकारी), डाॅ. जितेन्द्र नाग, डाॅ. इरशाद, डाॅ. अजहर सिद्दीकी (उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी), उदय प्रताप सिंह (जिला मलेरिया अधिकारी), डाॅ. आतीफ हसन (जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट), डाॅ. राहुल (रीजनल कोऑर्डिनेटर, डब्ल्यूएचओ), जुबैर आलम (जिला कोऑर्डिनेटर, पाथ), डाॅ. अनिता सिंह (रीजनल ऑफिसर, पीसीआई) सहित जनपद के सभी ब्लॉकों के अधीक्षक, वीसीपीएम, बीपीएम, सहायक मलेरिया अधिकारी, वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक एवं मलेरिया निरीक्षक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य फाइलेरिया रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार, प्रभावी स्व-देखभाल और विकलांगता की रोकथाम के प्रति जागरूक बनाते हुए जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने के अभियान को और अधिक प्रभावी बनाना है।









